29 दिसंबर 2016

नोटबंदी के दौरान पैसे के अभाव से हुई मौत के बाद मृतक के घर सांसद पप्पू यादव



मधेपुरा जिले के मुरलीगंज थानांतर्गत रामपुर पंचायत के वार्ड नं. 7 निवासी संजीव कुमार मंडल  पिता शंभू मंडल पिछले दिनों नोट बंदी के बाद दिल्ली से बीमार हो कर घर लौटा था, जिसकी मौत हो गई.

 बताया गया कि पिछले 2 वर्षों से वह दिल्ली में रहकर बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन के अंतर्गत मजदूरी का काम किया करता था, जिससे वह अपने बूढ़े मां बाप को पैसे घर भेजता था. पर नोट बंदी के बाद स्थिति बिगड़ने पर संवेदक से पैसे की मांग किए जाने पर नोटबंदी के कारण पैसे लिमिट दिए जाने की वजह से उसे पैसे का अभाव बताकर किसी तरह दिल्ली से घर की ओर रवाना कर दिया. बूढ़े पिता द्वारा गांव में चंदा इकट्ठा कर अपने बेटे की इलाज के लिए उसे पूर्णिया लेकर गया. जहां पूर्णिया में उसका सही ढंग से इलाज नहीं हो पाया और उसकी मौत हो गई. बूढ़े मां-बाप का एकलौता और कर्मठ पुत्र नोट बंदी की वजह से मौत के हवाले हो गया. उनके पीछे उनकी तीन बहनें भी हैं जिसकी उम्र 12 साल, 18 साल और 6 साल हैं और अब बूढ़े पिता के कंधो पर परिवार का बहुत बड़ा दायित्व गया.
     स्थानीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर उन्हें किसी तरह अपने जीवन यापन के लिए व्यवसाय को शुरू करने के लिए  ₹25000 दिए तथा पुत्री के नाम पर ₹30000 शादी के खर्च के लिए डाक घर में जमा करवाने की बात कही. उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि अगर आज यहां किसी अमीर के बेटे की मौत होती तो कैंडल मार्च के साथ-साथ बहुत कुछ हो जाता, लेकिन एक गरीब बेटे के मौत की खबर नोट बंदी कराने वाले या नोट बंदी पर भाषण देने वाले बड़े-बड़े नेताओं तक नहीं पहुंच पाई. नोटबन्दी के कारण  22 करोड़ लोगों का रोजगार खत्म हो गया. नोटबंदी से सिर्फ मध्यम वर्गीय और निचले स्तर के लोग प्रभावित हुए हैं. उनका रोजगार छीन लिया उनकी रोजी-रोटी प्रभावित हुई है. किसान अपने खेतों में लगी फसल पर हल चला रहे हैं. जीडीपी का ग्राफ नीचे उतर रहा है और 70% ग्रामीण अर्थव्यवस्था है, जिसे नोट बंदी की मार झेलनी पड़  रही है. उन्होंने कहा कि मैं इस मामले पर पीआईएल दायर करूंगा और इस मृतक को शहीद का दर्जा दिलवाऊंगा. साथ ही जो बिल्डर इनके पैसो को रोक कर रखा है उन पर भी मुकदमा चलाऊंगा.

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