15 दिसंबर 2016

‘क्या हुआ तेरा वादा?’: मधेपुरा के मिनी चम्बल के पूर्व डकैत पूछ रहे नीतीश से

मधेपुरा में आत्मसमर्पण कारी फिर से बन्दूक उठाने पर हो रहे हैं मजबूर. सरकारी सुविधाओं से मरहूम आत्मसमर्पणकारियों के सब्र का बाँध टूट रहा है. वर्षों बाद भी इन्हें सरकारी घोषणाओं के अनुरूप किसी तरह का कोई लाभ नहीं मिला. 
मधेपुरा के मिनी चम्बल घाटी के नाम से प्रसिद्ध मधेपुरा जिले के कुमारखंड प्रखंड के टेंगराहा-भोकराहा गाँव के पांच दर्जन से अधिक कुख्यात डकैत व अपराधियों ने वर्ष 1989 और वर्ष 2005 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समक्ष सिंहेश्वर प्रखंड मुख्यालय में किया था आत्म समर्पण. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इन डकैतों को समाज के मुख्य धारा से जोड़ने को लेकर कई अहम आश्वासन दिए थे. मुख्यमंत्री ने खुद इन लोगों से किये वादे के मुताबिक प्रत्येक परिवार को एक एकड़ जमीन और बच्चों की नि:शुल्क पठन-पाठन के अलावे पुनर्वास तथा सरकारी ऋण समेत रोजगार मुहैया कराने का भी दिया था भरोसा. लेकिन लगभग 15 वर्ष बीत जाने के वावजूद भी आत्मसमर्पणकारी व इनके के परिजनों को आज तक सरकार कुछ नहीं दी है. उम्मीद और भरोसे पर जिये जा रहे हैं ये लोग. अब 16 दिसम्बर को मधेपुरा निश्चय यात्रा पर आ रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इन आत्मसमर्पणकारी की जगी है उम्मीद कि कहीं फिर से मुख्यमंत्री जी इनके ऊपर हों मेहरबान.
      आत्मसमर्पणकारी बच्चू सरदार, बहादुर सरदार, परमानन्द सरदार, राशिक लाल सरदार आदि निराशा ही व्यक्त कर रहे हैं. स्थानीय जदयू विधायक रमेश ऋषिदेव ने कहा कुछ लोगों को सरकारी सुविधा मिली है और जो बचा है वह जल्द दिया जाएगा. वहीँ एसडीएम संजय कुमार निराला ने कहा कि मामला काफी पुराना है इस मामले की जानकारी मुझे नहीं थी. अब इस मामले में त्वरित कार्रवाई की जाएगी और सभी को जरुर सरकारी लाभ मिलेगा.
    भले ही आज तक आत्म समर्पण कारी को मिलता रहा है आश्वासन पर आश्वाशन. लेकिन सरकारी स्तर पर 15 वर्ष बाद भी मुख्यमंत्री जी के घोषणाओं के अनुरूप इन आत्म समर्पण कारियों को नहीं मिला है कोई लाभ. अब देखना दिलचस्प होगा आखिर कब तक सरकारी घोषणा पर जिला प्रशासन और खुद मुख्यमंत्री ध्यान देते हैं. 

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