31 दिसंबर 2016

डबल मर्डर का फॉलोअप: सुपौल से लाकर मधेपुरा में क्यूं मारी गई गोलियां ?

साल का अंतिम दिन मधेपुरा में एक साथ दो हत्याओं का दिन रहा और वर्ष 2016 ने जाते-जाते यह बता दिया कि अपराध की दुनियां अभी ख़त्म होने वाली नहीं है.
              आज सुबह तुलसीबाड़ी नहर के पास गोलियों की तड़तडाहत  के बाद मिली दो लाशों की पड़ताल में जुटी पुलिस को कई अन्य जानकारियाँ मिली हैं. पास मिले कागजातों से युवक की पहचान सुपौल जिले के पिपरा थानाक्षेत्र संजीत और राजीव के रूप में हुई तो पीपरा थाना को इसकी सूचना दी गई. पीपरा थाना ने उनके परिजन को सुबह 11बजे राजीव की हत्या की जानकारी दी गई जिसके बाद  परिजन मधेपुरा पहुंचे.
      मधेपुरा टाइम्स ने मृतक राजीव के बड़े भाई भोला यादव पिता सम्पति लाल से हत्या के बारे में पूरी बात जाननी चाहे. भोला यादव ने हमें बताया कि मेरा घर सुपौल जिले के पीपरा थानाक्षेत्र के विशनपुर बासा है. जिसकी हत्या हुई है वो मेरा छोटा भाई राजीव कुमार (उम्र 26 साल के करीब) है. बीती रात लगभग 11:30 बजे मेरे घर पर चार पाहिया वाहन  से उसी पंचायत का अमलेश यादव आया और बोला कि तुम्हारे मामा का एक्सीडेंट गाड़ी से हो गया है, तुमको बुलाया है चलो. गाड़ी मे भोला यादव ने जा कर देखा कि उस गाड़ी मे उसी पंचायत के शम्भू यादव, सतीश यादव, विपिन यादव, गजेन्द्र यादव, उमेश यादव तथा संजय कुमार यादव बैठे थे. देर रात होने के कारण भोला के मना करने के बावजूद वे लोग राजीव को गाड़ी पर बैठा कर चल दिये. देर रात जब उन्होंने भाई ने फोन पर सम्पर्क करना चाहा तो फोन ऑफ बता रहा था. आज सुबह पीपरा थाना से फोन आया कि मधेपुरा मे राजीव की हत्या हो गई है और साथ मे एक अन्य युवक संजीत कुमार,  पिता रामचंद्र प्रसाद यादव, जो उसी के साथ था, उस की भी हत्या हो गई है. संजीत मेही पट्टी मलार जिला सुपौल का रहने वाला है, जिसकी उम्र लगभग 32वर्ष थी.
        यहाँ संदेह के घेरे में कई बातें आती हैं. राजीव घर से अकेले निकला तो फ़िर उसके साथ संजीत कुमार कैसे आ गया और फ़िर तुलसीबाड़ी नहर तक राजीव कुमार यादव और संजीत  कुमार  को कैसे लाया गया?  हालांकि संजीत के परिजन को भी ख़बर कर दी गई है, पर समाचार लिखे जाने तक संजीत के परिजन मधेपुरा नहीं पहुंचे थे.
     मधेपुरा पुलिस मामले की गहरी छानबीन कर रही है. पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राजीव दबंग एवं अपराधी किस्म का था. राजीव के विरूद्ध सुपौल जिले में अलग-अलग थाने में गरीब 5-6 केस दर्ज हैं, जिसमें कई केस में चार बार जेल भी जा चुका है. वहीँ संजीत कुमार पिपरा बाजार में बिहार आवासीय कान्वेंट चलाते थे. हालांकि पूरे प्रकरण में आपसी दुश्मनी का मामला तो है ही, पर मृतकों के बारे में भी पूरी छानबीन के बाद ही इस निष्कर्ष तक पहुंचा जा सकता है कि कहीं ये गैंगवार का मामला तो नहीं? 

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