20 नवंबर 2016

दो दिलों कॊ जोड़ने का काम करती है हिन्दी और उर्दू भाषा: डीएम

उर्दू निदेशालय बिहार के आदेशानुसार जिला प्रशासन द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन मधेपुरा जिला मुख्यालय के समाहरणालय सभागार मॆ आयोजित किया गया.
जिले के सभी वरीय पदाधिकारियों की उपस्थिति में आयोजित कार्यशाला की अध्य्क्षता जिला पदाधिकारी मो० सोहैल आलम ने किया. इस मौके पर समाज सेवी औऱ शहर के बुद्धिजीवी औऱ जन प्रतिनिधियों ने अपने लफ्जों से उर्दू भाषा पर रोशनी डाली. जिला पदाधिकारी ने कहा कि उर्दू केवल मुस्लिमों की ही भाषा नही है. उर्दू हिन्दुस्तान की एक खूबसूरत जुबान औऱ कीमती सांस्कृतिक विरासत है. इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है. उर्दू भाषा मॆ आप सब जगह आवेदन दे सकते है औऱ हस्ताक्षर भी आराम से करें. उर्दू औऱ हिन्दी ये दोनों भाषा आपस मॆ मिल कर दो दिलों कॊ जोड़ने का काम करती है. उर्दू के बिना हिन्दी अधूरी है और हिन्दी के बिना उर्दू अधूरी है. जिला पदाधिकारी ने कहा कि सब से पहले हम अपने बच्चो कॊ तालीम दें. जब वह शिक्षा प्राप्त कर लेगा तब आप के बच्चों कॊ  कही भी परेशानी नही होगी. उन्होंने कहा कि आप के बच्चे मदरसा में दिनी तालीम लेते हैं तो अच्छी बात है लेकिन उन तालीम मॆ आप  दूसरी शिक्षा भी जोड़ें. उन्होंने मदरसे के शिक्षक कॊ  कहा कि आप लोग भी कोशिश करें ताकि मदरसे से भी बच्चा  जब पढ़ कर निकले  प्रतियोगिता परीक्षाएं निकाल सके.
     मौके पर मधेपुरा के डीडीसी मिथिलेश कुमार ने कहा कि उर्दू भाषा बहुत ही खूबसूरत भाषा है. आज़ हम बोलचाल के अलावे ग़ज़ल, संगीत आदि जगह उर्दू कॊ सुनते हैं.  एडीएम मुर्शिद आलम ने कहा कि आप अपने बच्चे कॊ हिन्दी के साथ उर्दू की भी तालीम दे. मौके पर कैयूम आलम, पार्वती कालेज के बी.एड. के प्रिंसिपल परवेज़ आलम ने कहा कि उर्दू आज़ हम लोगो से काफी दूर हो गई है. इसमॆ हमारी गलती है. समाज सेवी शौकत अली ने कहा कि हम लोग तो उतनी अच्छी उर्दू नही पढ़े लेकिन हम अपने बच्चों कॊ हर तरह तालीम से रूबरू करा रहे हैं. मौके पर शहर के अन्य बुद्धिजीवी और गणमान्य लोगों ने भी अपने विचार रखे.

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