16 नवंबर 2016

आयुक्त ने दिया भ्रष्टाचारियों से 15 दिन के अंदर 1.63 करोड़ वसूलने का आदेश

सुपौल। बिना कार्य पूर्ण किये सड़क निर्माण के नाम पर अभियंता एवं संवेदक के गंठजोड़ से करोड़ों रुपये गबन मामले में दोषी पाये गये अभियंताओं की मुश्किलें बढ़ गयी है.
आयुक्त कोसी प्रमंडल सह प्रथम अपीलीय प्राधिकार कुंवर जंग बहादुर ने मंगलवार को एक परिवाद पर निर्णय सुनाते हुए दोषी अभियंताओं से 01 करोड़ 63 लाख 79 हजार 416 रुपये वसूली करने का आदेश जिला पदाधिकारी को दिया है.
कहा गया है कि 15 दिनों के भीतर राशि की वसूली नहीं होने की स्थिति में गबन के लिए दोषी अभियंताओं एवं वर्तमान कार्यपालक अभियंता के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जायेगी. आयुक्त के इस आदेश के बाद संबंधित अभियंताओं एवं संवेदक सहित गबन के इस खेल में संलिप्त लोगों में हड़कंप मच गया है.
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत जिले के पिपरा प्रखंड अंतर्गत हटवरिया-निर्मली पथ तथा जीवछपुर दुबियाही पथ के निर्माण में ग्रामीण कार्य प्रमंडल के अभियंताओं  एवं संवेदक द्वारा बिना कार्य पूर्ण किये मापी पुस्तिका में कार्य पूर्ण दिखा कर करोड़ों रुपये की निकासी कर ली गयी और इस राशि का बंदरबांट कर लिया गया. इसी मामले में आयुक्त कोसी प्रमंडल द्वारा उक्त आदेश जारी किया गया है.

क्या है मामला?: संवेदक एवं अभियंताओं की मिलीभगत से करोड़ों रुपये गबन के इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता विद्यापुरी सुपौल निवासी अनिल कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री, आर्थिक अपराध इकाई सहित वरीय पदाधिकारियों को साक्ष्य के साथ आरोप पत्र समर्पित कर जांच का अनुरोध किया था. 07 जून 2013 को आर्थिक अपराध की टीम एवं मुख्य अभियंता ग्रामीण कार्य विभाग की अध्यक्षता में चार सदस्यीय टीम द्वारा स्थलीय जांच किया गया। जांचोपरांत आरोप एवं गबन का मामला सही पाया गया. मुख्यमंत्री के आदेश पर ग्रामीण कार्य विभाग बिहार सरकार के संयुक्त सचिव आर लक्ष्मण ने कार्य प्रमंडल सुपौल के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सुरेश कुमार सिंह, सहायक अभियंता विमल कुमार, कनीय अभियंता सुनील कुमार सिंह को दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया  था तथा दोषी अभियंताओं एवं संवेदक डीके इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्सन प्रालि सिल्लिगुड़ी पश्चिम बंगाल के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करते हुए गबन की गयी राशि 01 करोड़ 63 लाख 79 हजार 416 रुपये की समानुपातिक रूप से वसूली करने का आदेश दिया गया था.

तीन वर्ष बाद भी नहीं हुई राशि की वसूली: ग्रामीण कार्य विभाग बिहार सरकार ने 07 अगस्त 2013 को कार्य प्रमंडल सुपौल में पीएमजीएसवाय के अंतर्गत निर्मली-हटवरिया पथ तथा जीवछपुर-दुबियाही पथ के निर्माण में भारी अनियमितता बरतने एवं गबन की गयी राशि की वसूली दोषी अभियंतओं एवं संवेदक से करने का आदेश ग्रामीण कार्य विभाग कार्य प्रमंडल सुपौल के कार्यपालक अभियंता को दिया था. विभागीय अभियंताओं से ही राशि की वसूली की जानी थी, इसलिए सरकार के इस आदेश को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और तीन वर्ष बाद भी राशि की वसूली नहीं हो पायी. शिकायतकर्ता ने राशि की वसूली नहीं होने की स्थिति में 19 जुलाई 2016 को जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के कार्यालय में परिवाद पत्र दाखिल करते हुए राशि की वसूली एवं दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई का अनुरोध किया. लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने विभिन्न तिथियों में सुनवायी किया. सुनवायी करते हुए राशि वसूली का आदेश ग्रामीण कार्य विभाग के वर्तमान कार्यपालक अभियंता को दिया. लेकिन कार्यपालक अभियंता के द्वारा वसूली की कार्रवाई नहीं की गयी. अंतत: लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी अजय कुमार झा ने 20 सितंबर 2016 को अपना निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि विभागीय आदेश के बावजूद वर्ष 2013 से अभी तक पदस्थापित कार्यपालक अभियंता ग्रामीण कार्य प्रमंडल सुपौल द्वारा विभागीय पत्रांक 3048 दिनांक 07 अगस्त 2013 का अनुपालन नहीं कर सरकारी राशि की वसूली में लापरवाही एवं अनियमितता बरती गयी है.
              
आठ वर्ष बाद भी नहीं हुआ सड़क निर्माण पूर्ण:  प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अंतर्गत कार्य प्रमंडल सुपौल के वित्तीय वर्ष 2008-09 में पिपरा प्रखंड के निर्मली-हटवरिया पथ एवं जीवछपुर-दुबियाही पथ निर्माण की स्वीकृति दी गयी. कार्य पूर्ण करने की जवाबदेही सिल्लीगुड़ी पश्चिम बंगाल के संवेदक डीके इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्सन प्रा.लि. को दी गयी. 28 फरवरी 2009 को कार्य प्रारंभ किया गया. जबकि कार्य समाप्ति की तिथि 27 फरवरी 2010 निर्धारित किया गया।दोनों पथों के निर्माण की कुल लागत राशि 08 करोड़ 51 लाख 52 हजार 800 रुपये निर्धारित किया गया. संवेदक द्वारा 05 करोड़ 98 लाख 10 हजार 865 रुपये का भुगतान प्राप्त कर लिया गया जो किये गये कार्य से अधिक है. इस मामले में विभाग द्वारा जारी आदेश के बाद भी कार्य पूर्ण नहीं किया गया. कार्य पूर्ण नहीं होने के वजह से वहां के लोग आठ वर्षों से जर्जर सड़क पर आवागमन के लिए विवश हैं.

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