03 नवंबर 2016

सरकार का नया फरमान: आंधी-तूफान और बारिस अब नहीं प्राकृतिक आपदा में

आंधी-तूफ़ान और बारिस में होनी वाली क्षति को बिहार सरकार ने किया प्राकृतिक आपदा के दायरे से किया बाहर.
आंधी-तूफान और बारिस में मरने वालों को मुआवजा देने सम्बंधित सरकार ने पहले के आदेश को संसोधीत करते हुए इस दलील के साथ वापस लेली कि भूल-वश ये आदेश निकल गया था और इसे रद्द करते हुए सभी जिले के डीएम अन्य अधिकारी को इसकी सूचना दे दी गई है.
      बिहार सरकार आपदा प्रबंधन विभाग के ज्ञापांक-4052/2014 में कहा गया था कि आंधी-तूफान और भाड़ी बारिस में हुए क्षति को प्राकृतिक आपदा माना जाएगा और मृत व्यक्ति के परिजनो को तथा प्रभावित लोगों को मुआवजा दिया जाएगा. लेकिन बिहार सरकार आपदा प्रबंधन विभाग ने इस आदेश को भूल-वश पारित आदेश मानते हुए अपने ज्ञापांक-3811/2016 दिनांक -25-10-16 के द्वारा संशोधित कर कहा है कि अब आंधी-तूफान बारिश में हुए क्षति को प्राकृतिक आपदा नहीं माना जाएगा और ही किसी तरह की मुआवजा ही मिलेगा. सरकार ने यह साफ कर दिया है कि इस तरह की क्षति गृह क्षति आदि प्राकृतिक आपदा में नहीं आएगा. इसके अलावे बिहार सरकार आपदा प्रबंधन विभाग ने ज्ञापांक-3838/2016 दिनांक-27-10-16 में यह भी साफ कर दिया है कि बारिस के पानी तथा अन्य तरह से जल जमाव कीचड़ से हुई गृह क्षति को भी प्राकृतिक आपदा नहीं माना जाएगा तथा न ही किसी तरह का मुआवजा देने का प्रावधन है. आपदा प्रबंधन विभाग बिहार सरकार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि जब किसी नदी में आये उफान के बाद किसी गांव या शहर में पानी घुसता है और चारों तरफ से आने-जाने का संपर्क भंग हो जाता है तथा इस तरह की स्थिति दो से तीन दिन तक बरकरार रह जाती है और बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है तब उसे प्राकृतिक आपदा माना जाएगा तथा पीड़ितों को मुआवजा दिया जाएगा.
(Report: Rudra Narayan Yadav, Editor)                                                        

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