30 नवंबर 2016

मधेपुरा के बहुचर्चित बस स्टैंड मर्डर केस में 5 को उम्रकैद, हत्या के कारण में ‘तीर-लालटेन’ भी

वर्ष 2004 में मधेपुरा शहर में बस स्टैंड जैसी भीड़ वाली जगह पर दिन-दहाड़े गोलियों से एक व्यक्ति को मौत की नींद सुला देने के मामले में 12 वर्ष बाद ही सही, पर आखिर न्याय मिला है.
मधेपुरा के जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने आज इस मामले में पांच दोषियों को न सिर्फ उम्रकैद की सजा सुना दी बल्कि 25-25 हजार रूपये का आर्थिक दंड भी दिया है. यही नहीं मुख्य आरोपी, जिसकी गोली ने एक निहत्थे की जान ली, उसे और भी अधिक सजा दी गई है.
          मधेपुरा समाहरणालय से चंद कदम के फासले पर हुई इस हत्या को वर्ष 2004 के 22 मई को अंजाम दिया गया था और आरोप के मुताबिक सहरसा जिले के सौरबाजार थाना के जलीय पस्तपार निवासी हरेराम यादव को उसके ही गाँव के शंभू यादव, दिगंबर यादव, नन्द लाल यादव, कैलाश यादव और घोलट यादव ने मिलकर घेर लिया और घोलट यादव ने हरेराम को गोली मार दी. मामला हरेराम यादव के भाई राजाराम यादव ने मधेपुरा थाना काण्ड संख्यां 98/2004, अंतर्गत धारा 302/34 भारतीय दंड संहिता (मिलकर हत्या करना) तथा 27 आर्म्स एक्ट (अवैध हथियार का अपराध में प्रयोग करना) दर्ज किया गया था.

हत्या का कारण: सरेआम और दिनदहाड़े हुई इस हत्या के पीछे तीन आपसी दुश्मनी से सम्बंधित कारणों का होना मुक़दमे में गवाही के दौरान जाहिर हुआ था. पहला कारण गाँव की राजनीति थी जिसमें मुखिया के चुनाव में मृतक और हत्यारोपी दोनों ही प्रतिद्वंदी थे और दोनों ही चुनाव हार गए थे, कोई तीसरा जीता था. आरोपी घोलट यादव का मानना था कि यदि हरेराम चुनाव में खड़ा नहीं होता तो उसकी जीत पक्की थी. दूसरे कारण की जड़ में लोकसभा चुनाव थे. बताया जाता है कि उस समय राजद और जदयू प्रतिद्वंदी पार्टियाँ थी. घोलट लालटेन छाप की तरफ से बूथ मैनेज करने के प्रयास में था जबकि हरेराम तीर छाप की तरफ से उसे रोक दिया था. जिसपर घोलट ने हरेराम को देख लेने की धमकी दी थी. और फिर तीसरा कारण भी कुछ ऐसा हुआ कि हरेराम की हत्या कर दी गई. गवाहों के मुताबिक मधेपुरा बस स्टैंड में घोलट के पिता कार्यरत थे जिनकी मौत के बाद घोलट यादव वहां काम करने लगा. आरोप ये था कि हरेराम ने उसे हटवा कर किसी और को रखवा दिया था. आपसी दुश्मनी चरम पर पहुँच गई और यही वजहें इस हत्या का कारण बनीं.

आखिर मिली सजा: मामले की सुनवाई सत्रवाद संख्यां 213/2004 के रूप में मधेपुरा के जिला एवं सत्र न्यायाधीश मजहर इमाम की अदालत ने पूरी की. मुक़दमे के सभी पाँचों आरोपियों शंभू यादव, दिगंबर यादव, नन्द लाल यादव, कैलाश यादव और घोलट यादव को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाते हुए 25000 रूपये प्रत्येक को अर्थदंड भी लगाया. घोलट यादव को उम्रकैद और 25000 रूपये जुर्माने के साथ आर्म्स एक्ट में सात साल सश्रम कारवास और 10000 रूपये का अर्थदंड भी लगाया गया है.

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