11 नवंबर 2016

अब घर के बैंक ‘गुल्लक’ तोड़कर कर घर में बजेगी शहनाई!

एक तरफ पीएम मोदी के कालेधन पर जारी स्ट्राइक के बाद लोग 500 और 1000 के नोटों को लेकर परेशान हैं और शहर में अफरातफरी का माहौल है.
वहीँ मधेपुरा जिला मुख्यालय के कई बैंक के एटीएम ख़राब और बंद हैं. इसकी वजह से आज सबेरे से कतार में लगे लोग खासे परेशान हुए और भीड़ के कारण बहुत से लोगों को पुराने नोटों के बदले नये नोट नहीं मिल पा रहे हैं.
     इस मामले को लेकर जब बैंक प्रबंधन से पूछा गया तो कैमरे पर कुछ भी कहने से वे इनकार कर रहे हैं. बता दें कि ₹ 500 और 1000 के नोटों पर लगे प्रतिबंध को लेकर नोट बदलने की चारो तरफ होड़ लगी है. बैंक और एटीएम के आगे लोगों की लगी है लम्बी-लम्बी कतार. अधिकांश लोगों को खासकर एटीएम का फ़ायदा नहीं मिल रहा है एवं कई दो वक्त की रोटी को लेकर भी परेशान हैं. साथ में रुपये रहते भी होटल में खाना नहीं मिल पा रहा है. इस परेशानी के मद्देनजर जब मधेपुरा टाइम्स ने समाहरणालय के समीप स्टेट बैंक में मौजूद बैंक के कर्मी से सवाल किया तो बैंक कर्मी कैमरे पर कुछ भी बोलने से परहेज करते दिखे. वहीँ मधेपुरा टाइम्स ने शहर के अन्य बैंक और बैंक के एटीएम समेत एचडीएफ़सी बैंक का भी हाल जानने का प्रयास क्या तो कुछ ऐसा हीं चौकाने वाले हाल दिखा. जब बैंक के शाखा प्रबंधक से सवाल किया गया तो झलाते हुए शटर ही गिरा डाला. ऐसे में लोगों की परेशानी लाजमी है.
        मधेपुरा में एक अनुमान के अनुसार भले हीं जहाँ 60 प्रतिशत लोग पीएम मोदी के इस फैसले से खुश हैं, वहीँ 40 प्रतिशत मध्यम वर्ग के लोग परेशान जरुर हैं. चौंकाने वाली बात तो ये भी है कि अब विवाह का लग्न-मुहूर्त शुरू हो रहा है और अचानक सरकार के इस फैसले से  लोगों के रिश्ते भी ख़राब होने की सूचना मिल रही है. जानकारी के अनुसार मुनियाँ बेटी की शादी और शहनाई पर भी ग्रहण लगता दिख रहा है. मधेपुरा में ताजा उदाहरण सामने आया है एक शख्स की बेटी की शादी होने वाली है. यहाँ रुपये रहते भी भारी परेशानी हो रही है और अब लोग घर के गुल्लक भी तोड़कर बाजार में सामान खरीदने को मजबूर हो रहे हैं. जरा देखिये साथ वाली तश्वीर को, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक सामन खरीदने के लिए मधेपुरा के एक दुकान में गुल्लक तोड़कर टेबुल पर जमा पैसे रखे हैं. हालात अपने आप में बहुत कुछ बयां करने के लिए काफी है.
     कहा जा सकता है भले हीं केन्द्र सरकार ने कालेधन पर अंकुश लगाने का जोरदार प्रयास किया हो, लेकिन आम लोगों की समस्या काफी बढ़ गयी है. सभी जगह मध्यम वर्ग के लोग खासे परेशान दिख रहे हैं और बैंकों में रूपये रहते महत्वपूर्ण काम करने में वे बेबस हैं जबतक कि एटीएम से पहले की तरह एक दिन में कम से कम चालीस हजार रूपये की निकासी की व्यवस्था नहीं होती है, कहा जा सकता है कि पूरे देश में एक तरह की आर्थिक इमरजेंसी लग गयी है .
 (कुमार शंकर सुमन, सब एडिटर)

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