11 अक्तूबर 2016

..और धू-धू कर जल गया नकली रावण, जल न सकी अन्दर की बुराई !

देश भर में रावण दहन संपन्न हो गया. मधेपुरा में जिला मुख्यालय के भिरखी स्टेशन परिसर में अन्य सालों की तरह रावण दहन का कार्यक्रम संपन्न हुआ और लगाये गए आग ने रावण को जला डाला. मौजूद हजारों की भीड़ ने किलकारियां मारी और आपस में चर्चा करते हुए घरों को लौट गए.
            देखा जाय तो प्रतीकात्मक ही सही, पर रावणदहन बुराई पर अच्छाई की जीत है और लोगों के द्वारा दशहरा मनाये जाने का ये अर्थ तो जरूर होना चाहिए कि हम अप्मने अन्दर की बुराई को निकाल सके. पर देश भर में लाखों रावण जलाये जाते हैं और करोड़ों लोग रावण को धू-धू जलता देख उत्साहित नजर आते हैं. पर क्या समाज को जाति-धर्म के आधार पर बांटना कम हुआ है. क्या भाई-भतीजावाद और समाज के हर क्षेत्र में बढ़ते भ्रष्टाचार को कम करने में हम सक्षम हो पाते हैं? नहीं. महसूस कीजिए, बुराई हमारे अन्दर भी है. जरूरत है, अपने अन्दर की बुराइयों को निकाल फेंकने की, वर्ना हमारे द्वारा ही घास-फूस से तैयार कए हुए रावण ओ जलाकर खुश होने का शायद कोई औचित्य नहीं है.
     जो भी हो, मधेपुरा में रावण दहन का छोटा सा वीडियो जरूर देखें. यहाँ क्लिक करें.
(नि.सं.)

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