21 सितंबर 2016

बीएनएमयू पर दाग: धरना पर बैठे कर्मचारी फुलेश्वर मल्लिक की मौत, छात्रों ने फूंका वीसी और डीएम का पुतला

बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय संयुक्त छात्र संगठन का आक्रोश उस समय फूट पड़ा जब आज एक लगातार कई दिनों से धरना पर बैठे अस्थाई कर्मचारियों में से एक अस्थायी कर्मचारी फुलेश्वर मल्लिक की मौत हो गई.
     घटना से बौखलाए छात्रों ने कुलपति सहित डीएम का भी पुतला फूंका. छात्रों ने कुलपति के वादा खिलाफी व महीनों से चल रहे आन्दोलन के बाद भी अलग अलग बहाना कर कुलपति के पटना में जमॆ रहने को फुलेश्वर मल्लिक की मौत का कारण बताया. छात्रों का आरोप था कि अगर कुलपति समय पर आकर समझौता करते तो ये घटना नही घटती.
     एनएसयूआई नेता प्रभात कुमार मिस्टर व निशांत कुमार ने कहा कि कुलपति की मनमानी व प्रभारी कुलपति के लगातार मुख्यालय से गायब रहने के कारण हताशा मॆ कर्मचारी की मौत हुई है. A I S F के हिमांशु राज़ ने विरोध प्रकट करते हुए कहा कि अस्थायी कर्मचारी के मौत जिम्मेदार जिला प्रशासन भी लगातार दो माह से आन्दोलन जारी को देख रही है. विवि की व्यवस्था तहस नहस हो गई है. लेकिन जिला प्रशासन मौन धारण किये हुए है. उन्होने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन अगर सजग रहती तो आज़ फुलेश्वर मल्लिक की मौत नही होतीं. छात्र नेताओं की माँग है कि कुलपति अपने पद से इस्तीफा दे. उनको अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नही है.
      इस घटना के बाद छात्र संगठनों ने एक स्वर मॆ शंखनाद किया कि अब उग्र आन्दोलन समय की माँग हो चुकी है. विवि प्रशासन की मनमानी चरम पर हो गई है. इस मौके पर प्रवीण भारती, पुष्पकर पिंटू यादव, रोशन अभिषेक, विवेक, श्रवण प्रकाश सहित दर्जनों छात्र ने पुतला दहन कार्यक्रम मॆ अपनी मौजूदगी दर्ज करवाई और अपने आक्रोश का इजहार किया.
     बता दें कि फ़िर दोबारा B N M U मॆ छात्र आन्दोलन के तहत आमरण अनशन पर बैठ गये हैं. आज़ अनशन का तीसरा दिन है. इस से पहले मांगों को केकर अस्थायी कर्मचारी 5 सितम्बर से ही अनिश्चित कालीन हड़ताल पर थे.
    फुलेश्वर मल्लिक की मौत और छात्र संगठनों के उग्र रास्ता अख्तियार करने के बाद आज शाम तक स्थिति का जायजा लेने मधेपुरा के जिलाधिकारी मो० सोहैल, एसपी विकास कुमार, एसडीओ संजय कुमार निराला, एएसपी राजेश कुमार, प्रो वीसी जेपीएन झा आदि के अलावे सिंहेश्वर विधायक रमेश ऋषिदेव, पूर्व विधायक किशोर कुमार मुन्ना आदि भी पहुंचे. 
    इसके साथ ही विश्वविद्यालय के आन्दोलन ने नया रास्ता तैयार कर लिया है और वीसी समेत बेसुध और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ जहाँ छात्र संगठन और कर्मचारी संगठन का गुस्सा चरम पर पर है, वहीं आम लोगों में भी बीएनएमयू के प्रति नफरत के भाव आते दिख रहे हैं.

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