10 सितंबर 2016

एक बीमार विश्वविद्यालय: मधेपुरा का बीएनएमयू बना आन्दोलन व धरना-प्रदर्शन केन्द्र, छात्र हताश-परेशान

मधेपुरा का बी.एन.मंडल विश्वविद्यालय स्थापना काल से हीं आन्दोलन और धरना प्रदर्शन का केन्द्र बन कर रह गया है. यहाँ कभी अस्थायी कर्मी की हड़ताल तो कभी छात्र आन्दोलन के कारण एक वर्ष में 08 से 09 माह तक तो विश्वविद्यालय में हमेशा ताला ही लटकता रहता है.
    अस्थायी कर्मी की मांग है कि विश्वविद्यालय पहले अस्थायी कर्मी की नौकरी  पक्की करें फिर आउटसोर्सिंग के तहत नयी नियुक्ति करे. इन मांगों को लेकर अस्थायी कर्मी पिछले कई दिनों से लगातार हड़ताल पर अड़े हैं. जिससे कोसी सहित सीमांचल के छात्रों को भारी परेशानी के दौर से गुजरना पड़ता है. नतीजन यहाँ के छात्रों को सही समय पर डिग्री भी नहीं मिल पाती है क्योंकि सत्र काफी पीछे चल रहा है. बी.एन.मंडल विश्वविद्यालय में अस्थायी कर्मचारी का आज कई दिनों से लगातर हड़ताल है जारी. स्थाई नौकरी की मांग एंव सामंजन को लेकर अड़े हैं कर्मचारी विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार. नहीं है वार्तालाप को तैयार.
    विश्वविद्यालय में अभी भी कई दिनों से ताला लटक रहा है. विश्वविद्यालय छोड़कर कुलपति समेत अधिकारी गायब हैं. जिस कारण विश्वविद्यालय में सभी काम-काज ठप्प है. खासकर बाहर के छात्रों को भारी परेशानी हो रही है. बी.एन.मंडल विश्वविद्यालय के अस्थायी कर्मचारियों का फिर कई दिनों से लगातार हड़ताल जारी है. विश्वविद्यालय प्रशासन नहीं कर रही है कोई ठोस वार्तालाप की पहल. अस्थाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण विश्वविद्यालय कार्यालयों में स्थाई रूप से काम काज ठप है. जबकि आज कई दिनों से विश्वविद्यालय में एक तरफ परीक्षा नियंत्रक को हटाने की मांग को लेकर संयुक्त छात्र संगठन आन्दोलन कर रहे हैं तो वहीँ अस्थायी कर्मचारी अपनी मांग को लेकर लगातार हड़ताल पर अड़े हैं. बता दें कि विश्वविद्यालय आउटसोर्सिंग के तहत विभिन्न पदो पर नियुक्ति हेतु विज्ञापन प्रकाशित किया है, जिससे नाराज अस्थायी कर्मी पुन: हड़ताल जारी कर विश्वविद्यालय प्रशासन के विरुद्ध आन्दोलन पर उतारू हो रहे हैं. इन कर्मियों का मानना है कि विश्वविद्यालय स्थापना काल से हीं अस्थायी कर्मी के रूप में कार्यरत है इसलिए अस्थायी कर्मी की नौकरी पहले स्थायी हो फिर आउटसोर्सिंग के तहत बहाली की प्रक्रिया जारी हो. कर्मचारी का ये भी मानना है कि अब इस उम्र में हम कहाँ जाएंगे. इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार खुद जबाबदेह है.
    मौके पर संघ के नेता अखलेश कुमार, सचिदानंद यादव, संघ के सचिव संतोष कुमार, जवाहर कुमार यादव, ओषित कुमार, संजीव कुमार, चंदेश्वरी प्रसाद यादव, फुलेशवर मालिक सहित 80 अन्य कर्मचारी मौजूद थे.
    इस बाबत विश्वविद्यालय के कुलानुशासक डॉ विश्वनाथ विवेका ने अपने निजी आवास पर बताया कि विश्वविद्यालय धरना-प्रदर्शन का केन्द्र बना हुआ है. बगैर सूचना के हीं छात्र और अस्थायी कर्मी कभी भी आन्दोलन शुरू कर देते हैं, जिस कारण विश्वविद्यालय में सभी कार्य बाधित हो जाता है. प्रशासन को सूचना देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है. जिला प्रशासन को भी इस मामले में ध्यान देने की जरुरत है जो ध्यान नहीं दे पा रहे हैं. एक सवाल के जबाब में कुलानुशासक ने बताया कि कुलपति बीमार चल रहे हैं इस आशय की सूचना कुलपति महोदय को भी दे दी गयी है. 
      देखा जाय तो सिर्फ कुलपति ही बीमार नहीं है, बल्कि स्थापना काल से मंडल विश्वविद्यालय ही लाइलाज बीमारी का शिकार बना हुआ है. अराजकता यहाँ की विशेषता है और हर छोटे-बड़े कामों में लूट-खसोट के आरोप यहाँ के पदाधिकारियों पर लगते रहे हैं. शायद बीएनएमयू देश का सबसे बीमार विश्वविद्यालय है.

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