24 सितंबर 2016

वीसी के खिलाफ एफ़आईआर में लगी है जमानतीय धारा 304 (A) आईपीसी, आरोप साबित होने पर हो सकती है दो वर्ष तक की सजा

भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा में अनशन पर ही अस्थायी कर्मचारी की गत 21 सितम्बर को मौत के बाद फुलेश्वर मल्लिक की विधवा लीला देवी ने पति की मौत का जिम्मेवार कुलपति डॉ. विनोद कुमार, प्रति कुलपति डॉ. जे० पी० एन० झा, कुलसचिव डॉ० कुमारेश प्रसाद सिंह तथा अन्य पदाधिकारियों को मानकर इनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर आवश्यक कार्यवाही की मांग की थी, जिसके बाद मधेपुरा थाना ने कुलपति समेत अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लिया.
    21 सितम्बर को ही मधेपुरा थाना काण्ड संख्यां 603/2016 कुलपति डॉ. विनोद कुमार, प्रति कुलपति डॉ. जे० पी० एन० झा, कुलसचिव डॉ० कुमारेश प्रसाद सिंह तथा अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (A)/34 के तहत दर्ज किया गया और मामले में अनुसंधान का भार एसआई राजेश चौधरी को दिया गया है.

जानिए क्या है 304 (A)/34 आईपीसी?: इंडियन पेनल कोड (भारतीय दंड संहिता) की धारा 304 (A)/34 किसी की लापरवाही से किसी दूसरे की मौत होने पर लगाया जाता है. इनमें से धारा 34 कॉमन इंटेंशन (सामान्य इरादे) से कुछ व्यक्तियों के द्वारा मिलकर किये गए अपराध से सम्बंधित है.
    भारतीय दंड संहिता के अनुसार, 304A IPC को इस तरह से परिभाषित किया गया है.  “Causing death by negligence.—whoever causes the death of any person by doing any rash or negligent act not amounting to culpable homicide, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, or with fine, or with both.”
    यहाँ हम आपको जानकारी देते चलें कि 304A IPC जमानतीय धारा है जिसमें थाने से ही जमानत दी जा सकती है. ख़ास कर लापरवाही से वाहन चलाकर किसी की कुचलकर मौत होने पर भी 304A IPC की ही धारा के तहत प्राथमिकी दर्ज की जाती है.
    जाहिर है, वर्तमान मामले में कुलपति समेत अन्य अधिकारियो को जमानत तुरंत मिलेगी, भले ही ट्राइल के दौरान अधिकारियों को मधेपुरा न्यायालय कई बार आना पड़ सकता है और यदि मृतक की पत्नी तथा अन्य गवाह की गवाही लगाए आरोप साबित करने में सफल होते हैं तो अधिकारियों को अधिकतम दो वर्ष की सजा या जुर्माना या दोनों हो सकता है.

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