29 अगस्त 2016

मधेपुरा: महिला अल्पावास गृह बना टॉर्चर रूम! लड़की को बयान बदलने के लिए प्रताड़ित करने का आरोप

मधेपुरा का जिला महिला अल्पावास गृह पीड़ित महिलाओं के लिए बना है टॉर्चर रूम. बीते 2 वर्षों में कुपोषण तथा अन्य कारणों से 9 महिलाओं की मौत की बात कही जा रही है. अब एक पीड़िता ने महिला अल्पावास गृह के इंचार्ज पर बयान बदलने के लिए टॉर्चर करने का आरोप लगाया है, जिसके बाद सभी सकते में आ गए हैं.
     कहने के लिए तो महिला अल्पावास गृह शोषित, पीड़ित और हिंसा से प्रताड़ित महिलाओं के कल्याण के लिए संचालित है. लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां करती है. बीते दो वर्षों में यहाँ 9 महिलाओं की मौत बीमारी, कुपोषण तथा अन्य कारणों से हो चुकी है. अल्पावास गृह के पास रहने वाले धनञ्जय कुमार यहाँ की व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं. लेकिन अल्पावास की प्रशिक्षण सह पुनर्वास पदाधिकारी संजू कुमारी इस बात से इंकार करती है.
         नया मामला एक नव विवाहिता का है जो अपने प्रेमी के साथ भाग कर शादी की थी. लड़की के पिता ने अपहरण का मामला लडके और उसके परिवार वालों पर दर्ज करा दिया. लगभग 1 माह बाद लड़की पुलिस के सामने हाजिर हुई. लड़की ने पुलिस के सामने अपने प्रेमी पति के साथ रहने की बात कही. फिर उसे न्यायालय के सामने प्रस्तुत किया गया. न्यायालय ने उसे अल्पावास गृह भेज दिया. और यहाँ शुरू हुआ लड़की को प्रताड़ित करने का खेल जो आरोप लड़की ने अपने प्रेमी पति को लिखे पत्र में लगाया है.
       पत्र में नव विवाहिता प्रेमिका ने अपने प्रेमी पति से यहाँ (अल्पावास गृह) से जल्द निकालने का गुहार लगायी. कथित पत्र में उसने लिखा – “यार प्लीज मुझे यहाँ से जल्दी अपने पास लेकर चलो यार मैं यहाँ पागल हो जाऊँगी. यहाँ मुझे टॉर्चर किया जा रहा है मम्मी-पापा के पास जाने के लिए.....”
       लड़की अपने पति के साथ रहना चाहती है. लेकिन उस पर बयान बदलने का दबाव डाला जा रहा है. आगे पीड़िता ने महिला अल्पावास गृह की इंचार्ज पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए लिखा है- “यहाँ की इंचार्ज जबर्दस्ती मुझे दूसरे रूम भेज रही थी. जहाँ सब बीमार रहती है. किसी को टीबी, किसी को कुछ. जबर्दस्ती चारपाई पर मैं लेटी थी चारपाई खीच कर ले जा रही थी. मैं मर जाऊँगी यार बहुत टार्चर करती है मुझे...... “. पीड़ित लड़की के रिश्ते के ससुर ने आरोप लगाया कि उन्हें या उनके पक्ष से किसी को भी लड़की से मिलने नहीं दिया जाता है. जबकि लड़की के माता-पिता सहित अन्य परिवार वाले उसे आ कर बयान बदलने को कहते हैं. लड़की इन लोगों से नहीं मिलना चाहती है फिर भी उनसे मिलाया जाता है.
     कहने के लिए तो महिला अल्पावास गृह में पुरुषो का प्रवेश निषेध है. लेकिन यहाँ पुरुष भी आते हैं. जिस वक्त मधेपुरा टाइम्स की टीम वहां पहुंची, अल्पावास के पास लोगों की भीड़ थी. कैमरा देख लोग सरक भी रहे थे. धनञ्जय कुमार बताते हैं की यहाँ कुछ पुरुष लोगों को भी जाने दिया जाता है. लेकिन अल्पावास की प्रशिक्षण सह पुनर्वास पदाधिकारी संजू कुमारी इस बात से तथा अल्पावास गृह में किसी को भी टॉर्चर की बात से इंकार करती है. (वि.सं.)

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