18 अगस्त 2016

‘दर्द तो बाकी है’: कुसहा त्रासदी की 8वीं बरसी आज

मधेपुरा में कुसहा त्रासदी के आठ वर्ष आज पूरे होने के बावजूद आज तक अधिकांश पीड़ितों को झोंपड़ी तक नसीब नहीं हो सका है. बदहाली और बेबसी की मार आज तक झेल रहे हैं पीड़ित.
    18 अगस्त 2008 के दिन ही टूटा था कुसहा तटबंध और हुई थी कोसी सहित मधेपुरा इलाकों में भारी तबाही. अपनों से कोसों दूर हो गए थे लाखों लोग और हजारों वापस नहीं आ सके. वर्ष 2008 में आई कुसहा त्रासदी का दंश झेल रहे लोगों को आज तक अपना आशियाना नसीब नहीं हो सका है. ठंढ और बारिसों में खुले आसमान के नीचे बिना छत की टूटी-उजड़ी झोंपड़ी में रहने को बेबस हैं पीड़ित.
      बता दें कि आठ वर्षों में अब तक कोसी त्रासदी के सर्वाधिक बाढ़ पीड़ितों को नहीं मिल पाया कोसी पुनर्वास का लाभ. सरकारी कार्यालय का चक्कर काट-काट कर थक चुके हैं पीड़ित और कोसी त्रासदी को आठ वर्ष बीत जाने के बाद भी पहले से बेहतर कोसी बनाने का वादा सूबे की मुखिया नीतीश कुमार का आज भी टूटा ही नजर आ रहा है. 18 अगस्त 2008 आई भीषण तबाही के कारण रोड, रेल मार्ग सहित सभी यातायात का रास्ते बंद हो गए थे. दाने-दाने को मुहताज थे लोग. आठ वर्ष बीत जाने के बाद भी खौफ लोगों के मन में बाकी है. 18 अगस्त 2008 का नाम सुनते हीं आज भी लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं.
        क्षेत्र में वस्तु स्थिति साफ़ साफ़ सबकुछ बयां कर रही है. जबकि मधेपुरा को पुनर्वासित करने हेतु वर्ष 2008 में 60 हजार का लक्ष्य प्राप्त था और चार चरणों में जिला प्रशासन को पुनर्वासित का कार्य पूर्ण करना था. लेकिन जिला प्रशासन और सरकार की लापरवाही के कारण ससमय पीड़ितों का घर नहीं बनने को लेकर विश्व बैंक ने सहायता राशि में कटौती कर अब मात्र 26 हजार का लक्ष्य दिया है. जिसमे जिला प्रशासन के अनुसार कागजी खानापूरी कर आधे से अधिक का कार्य कर लिया गया है. पीड़ितों को प्रथम किश्त भी दिया जा चुका है. लेकिन धारातल पर आज भी बहुत से पीड़ित पुनर्वास का लाभ पाने के लिए लालायित हैं. किसी का अधूरा घर बनकर तैयार है पर उन्हें अगली राशि का भुगतान नहीं हो रहा है. इलाके में आज भी कुसहा त्रासदी के मारे कई ऐसे क्षतिग्रस्त घर सरकार और जिला प्रशासन को मुंह चिढ़ा रहे हैं. मधेपुरा के कई इलाकों में लोग बांस की चचरी के सहारे चलने पर मजबूर हैं.
    भले ही सूबे के मुखिया नीतीश कुमार बिहार में नया कोसी बनाने का सपना देख रहे हों पर इनके सपनों पर इनके ही नुमाइंदों ने पानी फेर रखा है. आठ वर्ष बीत जाने के वावजूद भी आज तक अधिकारी सिर्फ भरोसा दे रहे हैं. हालाँकि वहीँ मधेपुरा के जिलाधिकारी मो. सोहैल कहते हैं कि अब तक 26 हजार लक्ष्य के अनुरूप पहले पांच वर्षों में 11 हजार घर बने हैं जबकि पिछले दो वर्ष में सिर्फ साढ़े 12 हजार घर बनकर तैयार है. जल्द लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा.
     अब देखना है कि कब तक सूबे के मुखिया नीतीश बाबू का होगा कोसी बनाने का सपना पूरा होगा और कब तक मिलेगा पीड़ितों को पुनर्वास का लाभ और और कब तक पुनर्वासित छत के नीचे गुजारा करने का सपना पूरा कर सकेंगे त्रासदी पीड़ित.

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