14 अगस्त 2016

मधेपुरा: 8 साल पहले फर्जी माना गया प्रमाणपत्र अचानक हुआ सही? सेविका को प्रशिक्षण में भेजने के आदेश पर सवाल

एक बार फिर माया के चमत्कार के आगे नत मस्तक होते दिख रहे हैं बाल विकास कार्यालय के अधिकारी भी, जिन पर गरीब और नि:सहायों को इंसाफ दिलाने का जिम्मा रहता है. उसी कार्यालय ने साक्ष्य को छुपाते हुऐ जिस फर्जी प्रमाण पत्र के आघार पर केंद्र संख्या 62 के सेविका को प्रशिक्षण में जाने से रोक दिया उसी प्रमाण पत्र के आधार पर प्रशिक्षण में भेजने का आदेश निकाला. अब आठ साल के बाद ऐसा क्या दैवीय चमत्कार हो गया कि उस सेविका को प्रशिक्षण में भेजने के लिये डीपीओ राखी कुमारी को अपने कार्यालय से आदेश निकालना पड़ गया. जिस प्रमाणपत्र को पहले फर्जी माना गया था, वह फर्जी प्रमाण पत्र अचानक सही हो गया तो कैसे?
      जानकारी के अनुसार वर्ष 2007 में बाल विकास कार्यालय से सेविका व सहायिका पद के लिये बहाली प्रक्रिया शुरू हुई थी, जिसमें 01.01.2007 को उम्र 18 वर्ष होनी चाहिए, लेकिन चयनित अभ्यर्थी की जन्म तिथि 15.01.1989 थी, जिसके कारण दूसरे अभ्यर्थी रानी देवी की शिकायत को मान कर उसके प्रमाण पत्र के सत्यापन के लिये बिहार बोर्ड पटना भेजने का आदेश दिया गया. इसी बीच बिहार बोर्ड के सत्यापित कागज के लिये चूहे बिल्ली खेल शुरू हो गया, जिसमे लगा कि अधिकारी के साथ-साथ बोर्ड भी शामिल हो गया. कभी पिता का नाम गलत, तो कभी जन्म तिथि गलत, तो कभी स्कूल का फर्जी प्रमाण पत्र लगाना. हद तो तब हो गई जब एक ही दिन में बोर्ड से जन्म तिथि ही संशोधित करा कर ले आया गया. बताते हैं कि जिस पत्र के द्वारा 21.05.08 को बोर्ड ने जन्म तिथि संशोधित कर 01.01.89 करके भेजा गया, वह पत्र 22.05.08 को ही कार्यालय में पहुंचकर चमत्कार दिखा दिया और पंचायत को कथित सेविका को प्रशिक्षण में भेजने का आदेश भी दे दिया गया था और आदेश पत्र 22  मई को ही सेविका को प्रशिक्षण में जाने के लिये भी थमा दिया गया था. पर उसके बाद तत्कालीन बीडीओ सत्यप्रकाश शर्मा ने पत्र पर संदेह जताते हुऐ कथित सेविका को प्रशिक्षण मे जाने से रोक दिया था.
   जबकि गोरेलाल उच्च विधालय शंकरपुर के एचएम ने बताया कि बोर्ड के द्वारा किसी भी तरह के संशोधन की सूचना पहले संबंधित विद्यालय को दी जाती है है जो अब तक नही आई है. बताया गया कि वहीँ सिंहेश्वर विधायक रमेश ऋषिदेव ने डीएम मधेपुरा मो० सोहैल से इस फर्जीवारे में लिप्त अधिकारी और कर्मचारी को चिन्हित कर कार्रवाई करने अनुरोध किया है.

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