04 जुलाई 2016

मधेपुरा: बहुचर्चित रहे सौरभ हत्याकांड में 28 साल बाद दो को उम्रकैद

वर्ष 1988 में कोसी में चर्चित रहे मधेपुरा जिला मुख्यालय के सौरभ हत्याकांड में आखिर छात्र के परिवार को इन्साफ मिला. भले ही यह इन्साफ 28 साल के बाद मिला हो और अभी भी अधूरा हो, क्योंकि एक तो अन्य आरोपी को इसमें सजा मिलनी बाकी है और भावनात्मक स्तर पर सबसे बड़ी बात कि भले ही हत्यारे उम्रभर सलाखों के पीछे रहें, पर माँ-पिता के सामने अब वो 16 साल का सौरभ वापस नहीं आ सकता है.
    मधेपुरा के अपर सत्र न्यायाधीश श्री रमण कुमार के कोर्ट ने आज जब दो आरोपियों ब्रजेश सिंह और चन्द्रिका सिंह को उम्रकैद के साथ-साथ 50-50 हजार रूपये के आर्थिक दंड की सजा सुनाई तो जिले के उनलोगों के जेहन में बहुचर्चित सौरभ हत्याकांड की कहानी का घूम जाना स्वाभाविक था.
    बताते हैं कि सहरसा जिले के धबौली के राम सुन्दर सिंह मधेपुरा में सेन्ट्रल कॉपरेटिव बैंक में मैनेजर थे और उनके पुत्र 16 साल के सौरभ का अपहरण उस समय कर लिया गया था जब सौरभ बाजार गया था. 50 हजार रूपये की फिरौती और व्यक्तिगत दुश्मनी में गाँव के ही ब्रजेश सिंह और चन्द्रिका सिंह आदि पर पिता ने अपने बेटे के अपहरण का आरोप लगाया था. बाद में सौरभ की लाश मधेपुरा के आजादनगर के एक आवास से मिलने के बाद शहर में सनसनी फ़ैल गई थी. बताया गया कि सौरभ की हत्या गला दबाकर कर दी गई थी.
    मामले में कई गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर आज दो लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई.
(नि.सं.)

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