13 जुलाई 2016

“आज के युवा अध्यात्मिकता से विमुख होकर भाग रहे भौतिकता की ओर, बच्चों को बचपन से दें संस्कार”: भागीरथ जी महाराज

जिस प्रकार बह्य मूर्हुत में ध्यान को आवश्यक बताया गया है, उसी प्रकार संध्याकाल में भी ध्यान करना महत्वपूर्ण होता है.
      उपरोक्त बाते बिहारीगंज के महर्षि मेंहीं नगर स्थित संतमत संत्सग मंदिर में संध्याकालीन सत्संग के दौरान कुप्पाघाट भागलपुर से आए भागीरथ जी महाराज ने कही. उन्होंने कहा कि आप परिवार में रहकर शांतिपूर्वक त्रिकाल संध्या कर मोक्ष के द्वार की ओर अग्रसर हो सकते हैं, बर्शते उस क्रिया को करने के लिए आपको किसी योग्य गुरू से युक्ति जानना होगा. उन्होंने ध्यान योग के अलावे संयमित भोजन, संयमित जीवन, बच्चों को कैसे मिले सत्संग से संस्कार, पारिवारिक मेल, समेत तमाम बिन्दुओं पर प्रकाश डाला. उन्होंने आगे कहा कि आज के युवा आध्यात्मिकता से विमुख होकर भौतिकता की ओर अधिक से अधिक भाग रहे है. जिसका नतीजा है, वे अपने संस्कारो को भूलकर मां, पिता, भाई आदि परिवारजनों को अपमानित कर उसके साथ मारपीट भी करने लगे हैं. इसलिए बच्चों को बचपन से हीं ध्यात्मिकता के साथ साथ राष्ट्रभक्ति और धर्मभक्ति की शिक्षा दी जानी चाहिए.
   इस मौके पर अन्य साधुओं के अलावे भूमी बाबा, शिवा बाबा, नागेश्वर साह, श्रीकांत जी तथा अन्य संत्संगीगण उपस्थित थे.  
(रिपोर्ट: रानी देवी)

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