08 जुलाई 2016

‘ए मुहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया’: आखिर उखड़ ही गई सांस गुड़िया की

“जब हुआ ज़िक्र ज़माने में मोहब्बत का
मुझ को अपने दिल-ए-नाकाम 

पे रोना आया,
ऐ मुहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया,
जाने क्यों आज तेरे नाम पे रोना आया”.

        शकील बँदायूनी के लिखे ये शब्द आज उस मासूम लड़की पर फिट बैठते हैं जिसने मुहब्बत के चलते पहले घर छोड़ा और फिर इस दुनियां को ही अलविदा कह कर चली गई. मधेपुरा जिले के चौसा थानाक्षेत्र के अरजपुर पश्चिमी पंचायत के खलीफा टोला पोखर में इसी रविवार को अहले सुबह दर्द से कराहती मिली लड़की को बचाने से सारे प्रयास आखिरकार विफल साबित हुए और ग्वालपाड़ा थाना के अरार ओपीक्षेत्र के जयराम परसी निवासी नवल किशोर यादव की बेटी गुड़िया भारती ने आज पांच दिनों के बाद आखिर दम तोड़ दिया.
        पहले चौसा के पोखर में कराहती लड़की का मिलना और फिर उस मासूम बेटी पर एक पुलिस वाले की दया दिखाकर उसे मधेपुरा और फिर दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजना ताकि इसके साथ हुए दरिंदगी की पूरी कहानी सबके सामने आ सके और मासूम को इस हालात तक पहुंचाने वाले सलाखों के पीछे जा सके.
बताते हैं कि डीएमसीएच में जिन्दगी और मौत के बीच जूझते आज सुबह दम तोड़ने की खबर मिलने के बाद मृतका के माँ-बाप से अधिक चौसा थानाध्यक्ष सुमन कुमार सिंह सदमे में आ गए. बता दें कि ये वही थानाध्यक्ष हैं जिन्होंने मानवता की मिसाल पेश कर तबतक अज्ञात रही लड़की को बचाने खुद का एटीएम तक साथ लेकर तैयार थे.

क्या हुआ इस लड़की के साथ?: गुड़िया अपने ननिहाल शंकरपुर थानाक्षेत्र के मधेली में रहकर पढ़ाई करती थी. बताया जाता है कि इंटर की परीक्षा देने के बाद वह करीब ढाई महीने पहले वह ननिहाल से गायब हो गई थी. अब मृतका के पिता ने भी स्वीकार किया है कि उनकी बेटी प्रेम प्रसंग में घर से गायब हुई थी और ननिहाल मधेली के ही गजेन्द्र शर्मा ने पप्पू और विजेंद्र शर्मा की मदद से भगाया था. गाँव के लोग भी इसे प्रेम प्रसंग का मामला ही मान रहे हैं. कहते हैं कि खुद को अपमानित महसूस कर गुस्से में माता-पिता ने थाना में आवेदन तो दिया पर मुकदमा दर्ज कराने में कोई दिलचस्पी नहीं ली थी.
    सवाल बडा है और पुलिस की गहन जांच का भी विषय है कि क्या गुडिया को उसके प्रेमी ने इस अंजाम तक पहुंचाया या फिर इसकी मौत के जिम्मेवार और कोई हैं. गुड़िया की गर्दन इतनी बेरहमी से मरोड़ी गई थी कि उसकी मौत तक्षण ही हो जाती. पर शायद हत्यारों के गिरेबान तक पुलिस के हाथ पहुँचने थे कि पीड़िता पांच दिनों तक जिन्दा रह गई और अपनी पहचान भर बता सकी.
    अब सबसे बड़ी जिम्मेवारी मधेपुरा पुलिस के कन्धों पर पर है जो इस नाकाम मुहब्बत में मासूम को मौत के मुंह में धकेलने वाले उन चेहरों को सामने ला सके जो वास्तव में फांसी के फंदों या फिर उम्रकैद के हकदार हैं, चाहे हत्यारा प्रेमी हो या फिर मामला ऑनर किलिंग का ही क्यों न हो???
(वि.सं.)

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...