25 जुलाई 2016

मनोकामनापूर्ण है सावन की पहली सोमवारी को शिवलिंग पर जलाभिषेक

उतर बिहार के श्रंगी ऋषि की तपोभूमि बाबा भोले की प्रसिद्ध नगरी सिंहेश्वर स्थान में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी सावन के पहली सोमवारी को लाखों श्रधालु जलाभिषेक कर रहे हैं.
       इस पावन मौके पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं और पड़ोसी देश नेपाल सहित अन्य प्रान्तों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु बाबा भोले की नगरी सिंहेश्वर धाम आते हैं जहाँ बाबा की पूजा-अर्चना से सभी श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूर्ण बताई जाती है.
       बाराह पुराण एंव ग्रंथों के मुताबिक राजा दशरथ ने भी यहीं पर पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्रेष्ठी यज्ञ किया था और इसी के बाद राजा दशरथ को चार पुत्रों की प्राप्ति हुई थी. ग्रंथो के अनुसार यहाँ कभी पार्वती जी जंगल में हिरनी का रूप धारण कर सिंहेश्वर धाम में रहती थी जिन्हें ढूंढते- ढूंढते बाबा देवों के देव महादेव यहाँ आते थे. तभी से हीं यहाँ मनोकामना लिंग के रूप में पूजा अर्चना होती है. कहा जाता है कि बिहार के बंटवारे के बाद से उतर बिहार का देव घर माने जाने वाले सिंहेश्वर धाम का अपने-आप में एक बड़ा ही महत्व है. प्रसिद्ध सिंहेश्वर धाम को बिहार के सबसे बड़े धार्मिक स्थान के रूप में जाना जाता है. यहाँ त्रिदेव यानि देवों के देव महादेव सहित ब्रम्हा विष्णु की भी पूजा अर्चना की जाती है. मनोकामना लिंग के रूप में भी प्रसिद्ध है बाबा भोले की नगरी सिंहेश्वर धाम .
       श्रद्धालुओं का मानना है कि आज तक कोई भी श्रद्धालु यहाँ से वापस लौटकर खाली नहीं गया है, हर भक्तों की मनोकामना पूर्ण हुई है जिसके ऐसे कई प्रमाण भी है. कई श्रद्धालुओं ने बताया कि अगर बीच में कभी सावन में पहली सोमवारी को नहीं आना हुआ तो वह वर्ष कुछ खास नहीं गुजरा. वहीँ मंदिर के पुजारी मुन्ना ठाकुर ने बताया कि सावन की पहली सोमवारी को जो भक्त यहाँ आते हैं उनकी सभी मुरादे पूरी जरुर होती है.
        उधर एस.डी.एम संजय कुमार निराला सहित मंदिर के सचिव डी.डी.सी. मिथलेश कुमार के अलावे    जिलाधिकारी मो. सोहैल ने बताया कि सुरक्षा के दृष्टि कोण से भारी मात्रा में पुलिस बल की तैनाती की गयी है ताकि श्रद्धालुओं को कहीं से कोई परेशानी नहीं हो सके. मंदिर के गर्भ गृह सहित परिसर में पुख्ता सुरक्षा हेतु कई सीसीटीवी कैमरा भी लगाये गए हैं.

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