20 जुलाई 2016

बिना किताब के ही सरकारी स्कूलों में बच्चे बन रहे हैं कालिदास

मधेपुरा जिले के दर्जनों प्राथमिक और मिड्ल स्कूलों में स्कूली छात्रों को वर्षों बीत जाने के बावजूद भी अभी तक नहीं मिल पाया है. पाठ्य पुस्तकों के बिना ही बच्चे बन रहे हैं कालीदास. स्कूल में किसी तरह शिक्षक पठन-पाठन का कार्य अपने स्वविवेक से बच्चों को कराते हैं. विद्यालय के प्रधान शिक्षक किताब के लिए जिले के सरकारी दफ्तरों का चक्कर काट रहे हैं. 
    पदयात्रा के दौरान मधेपुरा पहुंचे सूबे के शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि बिहार सरकार को किताब के छपाई हेतु कागज नहीं मिल पा रहा है. बहरहाल बिहार टेस्ट बुक कारपोरेशन को भी हम लोग टाईट कर रहे हैं. लेकिन जहाँ से कागज की आपूर्ति होती थी वहां कुछ कठिनाई थी. अब सब जल्द ठीक हो जाएगा. अगले वर्ष के मार्च अप्रैल तक सूबे में सभी जगहों पर सरकारी स्कूलों को पुस्तकों की आपूर्ति कर दी जाएगी, हालाँकि बहुत जगहों पर किताबे आपूर्ति कर दी गयी है और जहाँ बांकी है वहां जल्द व्यवस्था कर किताबे आपूर्ति करने की दिशा में पहल हो रही है .
     जरा आप भी सोचिये, बिना किताब के हीं सरकारी स्कूलों में बच्चे कैसे बन रहे है कालिदास? मधेपुरा जिले के सरकारी मिड्ल स्कूल व प्राथमिक स्कूलों का ये हाल है जहाँ पिछले दो वर्षों से स्कूलों में बिना पुस्तक के हीं बच्चे किसी तरह शिक्षा ग्रहण करने पर मजबूर हो रहे हैं. स्कूल के शिक्षक बिना पुस्तक के ही अपने विवेक के आधार पर किसी तरह बच्चे को पठन-पाठन कार्य करवाने को मजबूर हैं. ये हाल सिर्फ एक स्कूल का नहीं है, बल्कि जिले के दर्जनों स्कूलों का यही हाल है. मधेपुरा टाइम्स सिर्फ बानगी भर एक सरकारी स्कूल को दिखाने जा रही है, जबकि दर्जनों सरकारी स्कूलों में बच्चों के भविष्य से सरकार और जिला प्रशासन खिलवाड़ कर रही है. भले ही सूबे की सरकार एक तरफ जहाँ बिहार में टापर घोटालों पर सिकंजा कस रहें हों, वहीँ दूसरी तरफ बिहार के मधेपुरा जिले में दर्जनों ऐसे सरकारी स्कूल हैं, जहाँ बच्चे को बिना किताब के हीं स्कूलों में किसी तरह कालिदास की शिक्षा प्राप्त हो रही है.
        भले ही सूबे के मुख्यमंत्री स्वास्थ्य और शिक्षा पर बल देने की बात कर रहे हों पर सूबे में हालात कुछ और हीं बयाँ कर रहे हैं. जब सूबे के सरकारी स्कूलों का ये हाल है तो सरकार द्वारा कदाचार मुक्त परीक्षा लेने का क्या औचित्य है? इस मुद्दे पर जब मधेपुरा टाइम्स ने सूबे के शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी से सवाल  पूछा तो मंत्री जी ने खुद स्वीकार किया कि शिक्षा व्यवस्था में घोर कमी है पर इसे जल्द सुधार करने का प्रयास भी किया जा रहा है. बहरहाल अब देखना दिलचस्प होगा कि कब तक सूबे के सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलेगी किताब और सुधरेंगे हालात.
   क्या कहा शिक्षा मंत्री ने, सुनें, यहाँ क्लिक करें.

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