13 जुलाई 2016

कोसी के कटनियां का कहर जारी, पांच दर्जन से अधिक घर नदी में समाहित

सुपौल। कोसी नदी के जल स्तर में जारी उतार-चढ़ाव के बीच प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत तटबंध के भीतर बसे कई गांवों में नदी का कटाव प्रारंभ हो गया है. कटाव की वजह से करीब पांच दर्जन से अधिक घर अब तक नदी में समाहित हो चुके हैं. वहीं सैकड़ों पीड़ितों द्वारा कटाव से बचने के लिये अपने घरों को तोड़ कर सुरक्षित जगहों पर ले जाने का प्रयास किया जा रहा है. जबकि सैकड़ों घरों पर अब भी कटाव का खतरा मंडरा रहा है. मॉनसून काल प्रारंभ होने के बाद से ही प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों की समस्या दिन ब दिन बढ़ती जा रही है. 

एकडारा गांव पर है विशेष खतरा: कोसी नदी अपनी धाराओं में हमेशा परिवर्तन के लिये कुख्यात रही है. यही वजह है कि हर वर्ष मॉनसून काल में नदी के संभावित धारा की दिशा के प्रति लोग सशंकित रहते हैं. कोसी का कहर किस गांव पर कब टूटेगा, लोगों को पता नहीं चलता है. यही वजह है कि हर वर्ष कोसी नये रास्ते बना कर दर्जनों गांवों पर अचानक अपना कहर बरपाती है. इसी क्रम में इस वर्ष तटबंध के भीतर बसा एकडारा गांव कोसी के निशाने पर है. गांव के करीब नदी में जबरदस्त रूप से कटाव लगा हुआ है. जिसकी चपेट में अब तक गांव के 50 से अधिक घर आ चुके हैं. कोसी की तेज धारा की वजह से एकडारा के समीप नदी में मुख्य धारा का रूप धारन कर लिया है. जिसके बाद प्रतिदिन एक ना एक घर पर नदी का कहर टूटता है और देखते ही देखते वह घर नदी में विलीन हो जाता है.  

बेकार साबित हो रहा है विभागीय कवायत: कोसी नदी में जारी कटाव के मद्देनजर जल संसाधन विभाग द्वारा बाढ़ निरोधात्मक कार्रवाई की जा रही है. इसी क्रम में एकडारा गांव में धनाय सादा के घर से लेकर धनजीत यादव के घर तक दक्षिण की दिशा में सिमेंट के पीलर का पाईलिंग किया गया है. लेकिन पाईलिंग की गुणवत्ता व उसका स्थापन सही नहीं रहने के कारण अधिकांस पाईलिंग नदी में गिर चुके हैं. जिसके कारण कटाव से बचाव का यह प्रयास बेकार साबित हो रहा है. गांव के जानकारों ने बताया कि पाईलिंग के समय इसके साथ ही घनी झारियों का प्रयोग करना चाहिये. जिससे कटाव की तीव्रता को कम किया जा सके. लेकिन सिर्फ सीमेंट पीलर की पाईलिंग कटनियां को रोकने में  असफल साबित हो रही है. ग्रामीणों ने बताया कि कटाव को रोकने के लिये सैन्ड बैग की क्रेटिंग की जानी चाहिये जो अब तक नहीं की गयी है. 

प्रभावित क्षेत्र में नाव की मांग: एकडारा से कई अन्य प्रभावित गांव के ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन द्वारा कोसी पीड़ितों की सुविधा के लिये अब तक पर्याप्त संख्या में नाव की बहाली नहीं की गयी है. जिसके कारण ग्रामीणों को आवागमन करने में काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है. नाव की कमी की वजह से पीड़ितों के बीच हमेशा असुरक्षा का भाव बना रहता है. वहीं पशु चारा लाने की समस्या भी उत्पन्न होती है. ग्रामीणों ने एकडारा बस्ती से लेकर नदी के पूर्वी भाग स्थित परसाही गांव तक समुचित संख्या में नाव के तत्काल बहाली की मांग की है.

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...