19 जून 2016

सड़क पर न बने आशियाना, तभी कम होगी दुर्घटना

आए दिन सड़क दुर्घटना का शिकार होकर लोग अपनी जान गॅवाने के साथ साथ अपंग बन रहे है. बावजूद इसके कई बार न तो वे अपनी सुरक्षा करते हैं और न हीं दूसरों की सुरक्षा का ख्याल रखते है.
     मधेपुरा में भी अन्य जगहों की तरह हाल बुरा है. सड़क नहीं रहने पर तरह तरह के आन्दोलन कर सड़क बनवाते है और जब सड़के बन जाती है, तो उसपर सुरक्षा मानको को दरकिनार कर सड़क पर माल मवेशी, अनाज का सुखाना, ठठेर का रखना समेत तमाम तरह का उपभोग करना आरंभ कर देते है. जिसका नतीजा होता है, जीवन देने वाली सड़के जीवन लेना आरंभ कर देती है.
       हालिया दिनों में मधेपुरा जिले के बिहारीगंज के मक्करी में सड़क पर मकई सुखाने वाले 30 वर्षीय फूलो महतों की मौत वाहन की चपेट में आने से हो गयी. बावजूद इसके आज भी लोग सड़को पर मकई सुखाने से बाज नहीं आ रहे है. चाहे बाजार की सड़के हो या गाँव की, हर जगह लोग सड़को का अतिक्रमण कर अपना निजी कार्य करते है.  जब दुर्घटनाएं होती है, दोष वाहन चालको के माथे पर मढ़ते है.
        जाहिर है जबतक लोग अपनी सोच नहीं बदलेगें तबतक दुर्घटनाएं होती रहेगी. इसके अलावे प्रशासनिक उदासीनता के कारण भी लोग बिना किसी भय के सड़क का उपयोग अपने निजी काम के लिए करते है, जिसपर रोक लगनी चाहिए.
(रिपोर्ट: रानी देवी )         

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