09 मई 2016

'सत्संग के प्रभाव से बड़े-बड़े दुष्ट भी सुधर जाते हैं'

भक्ति के बिना जीवन बेकार है. भक्ति स्वतंत्र है. भक्ति किसी भी प्रकार से किसी के अधीन नहीं है. भक्ति ही सुख की खान है परन्तु इस भक्ति की प्राप्ति सत्संग के बिना नही हो सकती है.
              उक्त बातें चौसा प्रखंड संतमत सत्संग समिति द्वारा आयोजित दो दिवसीय छठा वार्षिक अधिवेशन कार्यक्रम के पहले दिन रविवार को सत्संग समारोह को संबोधित करते हुए गुरूसेवी स्वामी भागीरथ दास जी महाराज ने कही. उन्होंने कहा कि अच्छे संस्कारों के बिना संत की प्राप्ति नहीं हो सकती है. संस्कार भी वही सार्थक जिनके द्वारा संत के दर्शन हो जाए. वही कर्म सार्थक हो जाते है जो हमें संत, महापुरूषों के चरणों में ले जाए. क्योंकि जब संतों की संगति की प्राप्ति होती है तभी जन्म मरण के कष्ट से मुक्ति मिल सकती है. इसी के द्वारा जन्म मरण रूपी बंधन का अंत होता है. जिस तरह पारस का संग करने से लोहे जैसी कम कीमत की धातु भी कितनी बहुमूल्य बन जाती है. इसी तरह सत्संग के प्रभाव से बड़े-बड़े दुष्ट भी सुधर जाते हैं.
    पूज्य स्वामी नरेशानंद बाबा ने कहा कि समाज में आज चारों तरफ विकृति ही विकृति फैली है. केवल धर्म में इतना सामर्थ्य है, जो एक व्यक्ति का पूर्ण रूपांतरण कर सकता है. वैसे तो आज अधिकांश मनुष्य ईश्वर को मानते हैं एवं भिन्न-भिन्न तरीकों से पूजा-अर्चना करते हैं. नित्यप्रति सत्संग कथाएं सुनते एवं धार्मिक ग्रथों का पठन-पाठन भी करते है और ऐसा करके सोचते हैं कि वे धार्मिक हो गए. यदि ऐसा है तो समाज अनैतिकता का खुला रंगमंच क्यों बना दिख रहा है. उन्होंने कहा कि ‘पानी पीजै छान के,गुरू कीजै जान के’ यह बहुत पुरानी कहावत है. हमारे पूर्वज स्वास्थ्य के प्रति इतने जागरूक थे कि पानी छानकर पीया करते थे. आज तो फिल्टर का युग है. अधिकतर जनता पानी छानकर ही पीती है. पर इसके साथ हमें आध्यात्मिक स्वास्थ्य हेतु अनुभवी पूर्वजों की दूसरी सलाह भी माननी चाहिए. गुरू भी जांच-परख कर ही धारण करें ताकि अपने जीवन रथ पर पूर्ण सारथि बनकर आसीन हो.
    सत्संग समारोह को पूज्य संजीवानंद बाबा, परशूराम बाबा, राजकुवंर बाबा आदि ने भी संबोधित किया. क्षेत्रीय गायक सुमन जी ने कई भक्ति गीतों को प्रस्तुत किया. कार्यक्रम का संचालन डा० उमेश प्रसाद नीरज ने की. मौके पर गौरीशंकर भगत, निवर्तमान मुखिया रेणु कुमारी, आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेन्द्र चौधरी, विनोद भगत, नंदनी मुनी, पंजाबी पासवान आदि व्यवस्थापक के रूप में देखे गये.

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