16 मई 2016

‘मौत पर भारी, जोश हमारी’: पत्रकारों की हत्या के खिलाफ मधेपुरा में बड़ा प्रदर्शन, समर्थन में उतरे राजनेता, बुद्धिजीवी और आमलोग

पत्रकारों पर हमले के खिलाफ आज मधेपुरा के राजनेता, बुद्धिजीवी और आमलोगों भी पत्रकारों के समर्थन में आज सड़कों पर उस समय उतर आए जब जिले भर के पत्रकार समाहरणालय के सामने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने जा रहे थे.
    कल की बैठक में लिए निर्णय के बाद सीवान के पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या के खिलाफ आज जब सभी मीडिया हाउस के पत्रकारों का जत्था मधेपुरा के जिलाधिकारी को मांग पत्र सौंपने चला तो मधेपुरा के दर्जनों राजनेता, बुद्धिजीवी और आम लोगों ने भी हत्या के विरोध की तख्तियां हाथों में उठा ली और साथ हो लिए.
    ‘बन्दूक पर पड़ेगी कलम भारी’, ‘मौत पर भारी जोश हमारी’, ‘हत्यारे को फांसी दो’, चौथे स्तंभ पर हमला नहीं सहेंगे’, ‘पत्रकारों को सुरक्षा दो’ आदि-आदि स्लोगन की पट्टियों के साथ जब नारे लगाते पत्रकारों के समर्थन में कई राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों के नेता, व्यवसायी, बुद्धिजीवी और आमलोग सैंकड़ों की संख्यां में सडकों पर चलने लगे तो जाम की स्थिति स्वाभाविक थी. चौथे स्तम्भ की सुरक्षा के सवाल पर अलग-अलग पार्टियों और विचारधाराओं के लोगों का एक साथ आना अपने-आप में अनूठा था.
    सभी वर्गों का एक प्रतिनिधिमंडल मांगपत्र लेकर जिलाधिकारी से मिला. मांगपत्र की मुख्य मांगें पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष वैधानिक प्रावधान करना, पत्रकारों के ऊपर होने वाले हमले की त्वरित और उच्च स्तरीय जाँच कराना, हमले की स्थिति में स्पीडी ट्राइल कर दोषियों को कड़ी सजा देना, राजनीतिक और आपराधिक हत्या के शिकार पत्रकारों को शहीद का दर्जा देते हुए उस श्रेणी की सभी सुविधाएं मुहैया कराना और परिजनों को सम्मानजनक मुआवजा के साथ एक आश्रित को सरकारी नौकरी देने की व्यवस्था करना आदि थी.
    मधेपुरा के जिलाधिकारी मो० सोहैल ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों को ध्यान से सुना और पूरे सहयोग का भरोसा दिलाया. मांगपत्र की प्रति भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, लोकसभा अध्यक्ष, देश के गृह मंत्री, भारतीय प्रेस परिषद् के अध्यक्ष, मानवाधिकार आयोग आदि को भेजी जा रही है.

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