08 मई 2016

सोशल मीडिया आज ‘मदर्स डे’ के नाम: बाहर लोगों को नहीं पता

सोशल मीडिया पर जहाँ आज ‘मदर्स डे’ की धूम है वहीँ सोशल मीडिया से बाहर के लोग इस दिन से अनजान हैं.
    सोशल मीडिया खासकर सबसे ज्यादा लोकप्रिय फेसबुक और ट्विटर पर बीते कल से यूजर्स ने मदर्स डे (मातृ दिवस) इस कदर मनाना शुरू कर दिया कि पूरे पेज पर मदर्स डे के संदेशों के अलावे अन्य संदेशों की संख्यां अत्यंत ही कम है. खासकर फेसबुक पर बहुत सारे यूजर्स ने आज की तस्वीर अपनी माओं के साथ अपलोड कर उनके प्रति प्रेम और श्रद्धा अर्पित किया है.
    सच ही है, किसी भी व्यक्ति के जीवन में माँ की महत्ता से इनकार नहीं किया जा सकता है. माँ है तो सृष्टि है वर्ना संसार का चलना असंभव है.
    पर माँ के प्रति अथाह प्रेम प्रदर्शन करने वाले या रखने वाले हर इंसान को एक बात जरूर याद रखनी चाहिए कि यदि वे अपनी माँ को प्यार करते हैं तो उन्हें बेटी के जन्म से भी परहेज नहीं होना चाहिए. क्योंकि आज की बेटी ही कल की मां होगी जो सृष्टि को कायम रख सकेगी या फिर ऐसे कहें कि आज जो हमारी प्यारी माँ है उन्होंने कल बेटी के रूप में जन्म लिया था और यदि उन्हें जन्म लेने से रोक दिया जाता तो आज माँ के महत्त्व को जानने के लिए संसार में हमारा अस्तित्व नहीं होता. जाहिर सी बात है ‘सेव डॉटर, सेव फ्यूचर’.
    एक तरफ जहाँ सोशल मीडिया पर ‘मदर्स’ डे’ की धूम रही वहीँ सोशल मीडिया का प्रयोग न करने वाले अधिकाँश लोग इस दिवस से अनजान दिखे. कुछ लोगों का कहना था कि माँ के लिए तो हर दिन होना चाहिए, तो फिर एक दिन उनके नाम करने का क्या मतलब? नगर परिषद् क्षेत्र के गुलजारबाग के रहने वाले एक बुजुर्ग दंपत्ति का दर्द उनकी बातों से छलक जाता है. नाम न छपने की शर्त पर कहते हैं, ‘तीन बेटे हैं हमारे, सभी पढ़ लिखकर बहु-बेटों के साथ बाहर रहते हैं, पर आज हमें देखने वाला कोई नहीं’.
     जाहिर है, सिक्के के दो पहलू होते हैं. मदर्स डे मनाने का तब ही औचित्य है जब हम जितना प्यार अपने बच्चों से करते हैं उतना ही प्यार अपने माता-पिता से भी करना होगा, क्योंकि समय के घूमते पहिये में सब एक-दूसरे के पूरक हैं.

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