04 मई 2016

बचपन बना बोझ: क्षतिग्रस्त नाक और आँख वाले अविनाश को है मसीहा का इन्तजार

सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के मटिहानी गाँव के नौ महीने के अविनाश को जो कोई भी देखता है, आह भरने के सिवा कुछ नहीं कर पाता है. नौ महीने के इस मासूम को भगवान् ने धरती पर तो भेजा, लेकिन क्या सोचकर, ये हर किसी के समझ से बाहर है. जन्म से ही अविनाश की आँखें और नाक बुरी तरह खराब है. अविनाश को सांस तक लेने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. पिता राज कुमार सादा हताश हैं और सोच नहीं पा रहे हैं कि इस बच्चे की जिन्दगी आगे कैसे चलेगी. अविनाश मुश्किल से जिन्दा है और यदि उसका इलाज न हुआ तो उसकी मौत कभी भी हो सकती है. राज कुमार बताते हैं कि बेटे के जन्म को लेकर वे बहुत ही खुश थे पर उनकी ख़ुशी उस वक्त गम में बदल गया जब जन्म के बाद उन्होंने बच्चे का चेहरा देखा. हैसियत भर इलाज भी कराया पर क्या कमायें, क्या खाएं और क्या बचा कर इलाज कराएँ. हालांकि आवाज देने पर अविनाश गर्दन घुमाता है जो इस बात का संकेत है कि बच्चे में बहुत कुछ बाकी है.
       बता दें कि सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के बलवा हाट ओपी में मटिहानी गाँव करीब सौ घर का एक महादलित टोला है. इसी टोले में शुरू में ही इस बदनसीब बच्चे अविनाश के पिता राज कुमार सदा का घर है. बच्चे की तस्वीर सबसे पहले सोशल मीडिया पर कोसी के जाने-माने फोटोग्राफर अजय कुमार ने पोस्ट की तो अविनाश के प्रति सहानुभूति प्रदर्शित करने कई लोग सामने आए.
        पर चिकित्सकों का कहना है कि सर्जरी से अविनाश का इलाज तो संभव है, पर इसमें लाखों रूपये खर्च आ सकते हैं. मजदूरी कर दो जून की रोटी का इंतजाम करने वाला पिता बेबस है और शायद अविनाश को जिन्दगी तब ही मिल सकती है जब कोई संस्था या नेता-अभिनेता या फिर कोई मसीहा इस मासूम को गोद लेकर इसका इलाज करा दे. वैसे इस मासूम को बचाने सहरसा प्रशासन या सांसद आदि भी यदि आगे जाएँ तो वो एक सुखद क्षण होगा. यदि ऐसा नहीं हुआ तो इस मासूम की साँसें थमते ही परिवार की खुशियों का उजड़ जाना तय है.
(वि.सं.)

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