29 मई 2016

महान समाजवादी नेता व आजादी के योद्धा थे स्व० भूपेंद्र नारायण मंडल (पुण्यतिथि आज)

स्व० भूपेंद्र नारायण मंडल (बी० एन० मंडल) का जन्म रानीपट्टी इस्टेट (मधेपुरा जिला) के जमींदार बाबू जयनारायण मंडल और दानावती देवी के घर 1 फरवरी 1904 को हुआ था. इनकी शिक्षा रानीपट्टी, मधेपुरा, मुंगेर भागलपुर व पटना में संपन्न हुई. पटना विश्वविद्यालय से इन्होने विधि स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की थी. इनका विवाह 1926 में राधा देवी जी के साथ संपन्न हुआ. 1930 में वकालत पेशा के साथ ही इन्होंने अपना सार्वजनिक जीवन आरंभ किया.
        महात्मा गांधी के आवाहन पर 1921 से इन्होने असहयोग आंदोलन में छात्रों को नेतृत्व प्रदान किया. 1940 में मधेपुरा के छात्रों द्वारा चलाया गया छुआछूत मिटाओ आंदोलन में भी इन्होंने मुख्य भूमिका का निर्वहन किया.
   13 अगस्त 1942 को मधेपुरा स्थित ट्रेजरी बिल्डिंग पर तिरंगा फहरा कर विशाल जन समुदाय को नेतृत्व प्रदान किया. स्वाधीनता प्राप्ति और फिर 1948 में गांधी जी की हत्या के बाद वर्ष 1949 में सोशलिस्ट पार्टी का गठन हुआ, जिसमें भूपेन्द्र नारायण मंडल की महत्वपूर्ण भूमिका थी. 1952 में मधेपुरा विधानसभा के लिए इन्हें उम्मीदवार बनाया गया, लेकिन पार्टी के संगठन के अभाव में ये हार गए. इसी क्रम में 1953 में भूपेंद्र बाबू की अगुवाई में टीपी कॉलेज मधेपुरा की स्थापना की गई. इस महाविद्यालय की स्थापना भूपेंद्र बाबू के जीवन की सर्वप्रथम और सर्वश्रेष्ठ जन-मुहिम थी. इस महाविद्यालय की स्थापना कालांतर में विश्वविद्यालय बीएनएमयू) निर्माण का आधार बना. मधेपुरा जिला मुख्यालय का स्टेडियम (बी. एन. मंडल स्टेडियम) का नाम भी इन्ही के नाम पर रखा गया है.
          1957 के आम चुनाव में संपूर्ण बिहार में भूपेंद्र नारायण मंडल एकमात्र सोशलिस्ट पार्टी के विधायक थे. इन्हें अखिल भारतीय सोशलिस्ट पार्टी का अध्यक्ष का दायित्व 1949 में सौंपा गया. 1962 के लोकसभा चुनाव में उन्हें सफलता प्राप्त हुई. लेकिन न्यायालय में इस चुनाव को अवैध ठहरा दिया गया. ये अलग बात है कि इस महान समाजवादी नेता के चुनावी राजनीति की शुरुआत (1952) पराजय और अंत भी पराजय (1964) से ही हुई,पर इन्होने लोगों के दिलों पर अंत तक राज किया.
         1968 में और पुन: 1972 में बड़े ही सम्मान के साथ इन्हें राज्य सभा के लिए चयनित किया गया. परतंत्र भारत में दो बार और स्वतंत्र भारत में चार बार जेल भी भेजे गए. सांसद रहते हुए भूपेन्द्र बाबू ने अपनी अंतिम सांस 29 मई, 1975 को टेंगराहा (कुमारखण्ड, मधेपुरा) में ली. आज 41वीं पुण्यतिथि पर इस महान शख्सियत को शत-शत नमन्....
(ए.सं.)

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...