23 मई 2016

देशी शराब और बनाने के सामान के साथ दो आदिवासी फिर गिरफ्तार

गुप्त सूचना के आधार पर एक्साइज विभाग ने अधिकारियों ने मधेपुरा जिले के मुरलीगंज के बलुआ पुल के पास संथाली टोला में छापा मारकर कर दो व्यक्ति को देशी शराब के साथ गिरफ्तार कर लिया है.
      गिरफ्तार दोनों व्यक्ति आदिवासी समुदाय से आते हैं और इनके नाम दिलीप मुर्मू और रमेश मुर्मू हैं. बताया गया कि दोनों के यहां से 7 लीटर चुआया हुआ देशी शराब,  90 किलो गुडकी,  दो देशी शराब बनाने की मशीन भी जब्त किये गए हैं.
      बता दें कि सरकार की पूर्ण शराबबंदी का असर आलीशान महलों में महँगी शराब पिने वालों पर कम और पुश्त-दर-पुश्त देशी-ठर्रा-महुआ बनाने वाले गरीब और आदिवासियों पर अधिक पड़ रहा है. बिहार में समाज को दहशत में डालने वाले अपराधियों के खिलाफ पुलिस कम और देशी शराब पीने और बनाने वालों को खिलाफ अभियान चलाई हुई है. कई तस्वीरों में तो एक 'निरीह अभियुक्त' को पूरी फ़ोर्स घेरे हुए नजर आती है, मानो कोई कुख्यात अंतर्राजीय अपराधी धराया हो. क़ानून हद से ज्यादा सख्त बना दिए गए हैं. बीते दिनों शराब बनाने के आरोप में एक महिला को भी मधेपुरा में जेल भेजा गया था, जिसके परिवार की रोजी-रोटी तब से इसी धंधे पर आधारित थी, जब सरकार ने गली-गली में शराब बेचनी शुरू की थी.
       हम अपने पाठकों को बताते चलें कि बिहार  में पूर्ण शराबबंदी पर पिछले हफ्ते पटना हाइकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि एक पैग शराब पीने पर 10 साल की कैद, यह कैसा कानून है. व्हिस्की का एक पैग लगाने का 10 साल तक जेल न्यायोचित है. क्या इतनी सख्त सजा में संशोधन जरूरी नहीं है? सरकार की ओर से पेश हुए प्रधान अपर महाधिवक्ता ललित किशोर ने दलील ​दी कि शराबबंदी से लाखों महिलाओं के मुख पर मुस्कान आई है. इस पर कोर्ट ने कहा कि शराबबंदी से पहले ये लाखों महिलाएं एक सुर में रो रहीं थीं क्या?
(कुछ अंश: dailybiharnews.in से साभार)

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